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HAR SUNDAR CHEEJE, SAB KE LIYE SUNDAR KYON NAHEEN HOTI/
koi pass akar khada hojata hai ,
koi duur se hee dekh kar nikal jata hai
kya yah inssan kee soch hai,
kya yah wah cheeje hai jo sab ko pasand hai bhi aur naheen bhee ,
kya ham iss ke bare mai ,wahee sochte hain , jo hamai samaj ne bataya hai,
agar iss mai se kuchh bhee naheen ,fir yah sundarta hai kya ?
aag to jalaye gee, ham kuchh bhee sochain,
panee to bhigoyega, ham kuchh bhee sochain,
hawa bhee apna ahsah dilayegee, ham kuchh bhee sochain,
yadi in ka astitwa hai, to yah sundarta kya hai?kahan hai, aur kaisee hai?
ये रिश्ते क्यों इतने कमजोर होते हैं,
स्वार्थ के एक प्रहार से बिखर जाते हैं
एक पल मै ऐसा लगता है जैसे हम अनजाने हों
क्यों नफरत और शक इन्हें बर्बाद करते हैं
हम इतने क्यों गिर जाते हैं क़ि
कोई भी हमें खरीद लेता है
पैसे की चमक दिखा कर या खूबसूरती के जाल मै फंसा कर ,
या फिर लालच का तीर चलाकर , या फिर धोखा देकर ,
खूबसूरत आँखों से निकलते आंसू कभी देखो ध्यान से
बुरे वक़्त मे, "मै" को छोड़कर, हाथ जोड़ते लोगों को देखो
समझ मे आजायेगा , रिश्ते क्या हैं, धागे से बंधने के बाद भी मज़बूत क्यों हैं
दो बिछुड़े प्रेमियों को रोते देखो,
और फिर प्रायश्चित के बाद , लिपट ते देखो.
समझ मे आ जाए गा , रिश्ते क्या हैं,
फिर भी , समझ न आये , तो माँ की गोद मे बैठ के देखो
रिश्ते क्या हैं, रिश्ते क्या हैं
कितना शुकून मिलता है ,अकेले होने के बाद,
हम क्यों भीड़ मे दोस्तों को और अपनों को ढूंढते फिरते हैं ,
क्या मिलता है हमे उनके चले जाने के बाद ,या मिलने के बाद ,
जिनकी बेरुखी भी हमें तकलीफ देती है,
जिनका अपना पन भी ,जाने के बाद सताता है ,
क्या मिलता है हमे , और फिर भी हम हर बार क्यों भटकते हैं,
किसी को अपना बना ने को ,अपनी बात बता ने को
शायद हम अपनी ही बात बता ते रहते हैं दूसरों की बात सुनते ही नहीं ,
शायद हम खुद को ही अच्छा बताते रहते हैं , दूसरों को कहने का मोका भी नहीं देते,
हम से तो अच्छी उन की बे वफाई है ,जो कम से कम सचाई का दर्पण तो दिखाती है ,
उन्हें कुछ बोलने का ,सुन ने का और करने का साहस तो देती है ,
कुछ दिन तक हमारा अहंकार , हमें उन से नफरत कराता है,
परन्तु बाद मे ,सचाई का दर्पण दोनों के सामने होता है ,
एक उस पर लगी पुरानी यादों की धूल को आंसुओं से धोता रहता है ,
तो दूसरा उसे रोता देख कर भी ,कुछ नहीं कर पाता ,
शिवाय पछताने के ,कभी बेवफाई के नाम पर , तो कभी ऊपर वाले की मर्जी कह कर